POCSO | पुलिस हिरासत | 60 दिन | समस्याग्रस्त | क्यों?

09 Aug 2025 : 13:58 Comments:  Views: 
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Posted by Administrator

POCSO | पुलिस हिरासत | 60 दिन | समस्याग्रस्त | क्यों?

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POCSO | पुलिस हिरासत | 60 दिन | समस्याग्रस्त | क्यों? – Misuse of Police Custody

लेखक: Dr. Anthony Raju, Advocate Supreme Court & Leading Expert in POCSO Cases, Chairman – Indian National Human Rights Protection Council

कानूनी पृष्ठभूमि

BNSS 2023 (पहले CrPC 1973) के तहत, गिरफ्तारी के बाद पुलिस हिरासत अधिकतम 15 दिन तक ही हो सकती है।

चार्जशीट दाखिल करने की समयसीमा:

60 दिन – यदि अपराध की अधिकतम सजा 10 वर्ष तक है।

90 दिन – यदि अपराध की अधिकतम सजा 10 वर्ष से अधिक, आजीवन कारावास या मृत्युदंड है।

POCSO Act के तहत गंभीर धाराएँ (धारा 4, 6) 90 दिन की कैटेगरी में आती हैं, जबकि हल्की धाराएँ (धारा 7/8, 9/10) 60 दिन में।

समस्याग्रस्त क्यों?

गलत समयसीमा लागू करना: कई बार पुलिस हल्की धारा लगाकर केस को 60 दिन में सीमित करती है, जिससे डिफ़ॉल्ट बेल से बचा जा सके।

पुलिस हिरासत का दुरुपयोग:

15 दिन की सीमा होते हुए भी, बार-बार रिमांड मांगकर हिरासत बढ़ाने का प्रयास।

आरोपी पर दबाव डालने, जबरन बयान या स्वीकारोक्ति लेने की कोशिश।

संवेदनशील मामलों में बच्चे/पीड़ित के बयान के बहाने हिरासत बढ़ाने की मांग।

जांच की गुणवत्ता प्रभावित: जल्दबाजी में चार्जशीट दाखिल करने से जांच अधूरी और कमजोर हो जाती है।

Dr. Anthony Raju के विचार

"POCSO मामलों में पुलिस हिरासत का दुरुपयोग एक गंभीर चिंता है। कानून ने 15 दिन की सीमा और 60/90 दिन की चार्जशीट समयसीमा इसलिए तय की है ताकि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध हो। लेकिन जब पुलिस गलत धारा लगाकर या बार-बार रिमांड लेकर इन प्रावधानों को मोड़ने की कोशिश करती है, तो यह आरोपी के संवैधानिक अधिकारों और पीड़ित के न्याय, दोनों को खतरे में डालता है। एक सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट और POCSO मामलों के विशेषज्ञ के तौर पर, मैं मानता हूँ कि अदालतों, वकीलों और मानवाधिकार संगठनों को इस दुरुपयोग पर सख्त नज़र रखनी चाहिए और BNSS व POCSO के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना चाहिए।"

— Dr. Anthony Raju, Advocate Supreme Court & Leading Expert in POCSO Cases

डिफ़ॉल्ट बेल की रणनीति

गिरफ्तारी की तारीख से समय गिनें — 60 या 90 दिन की सही श्रेणी तय करें।

गलत धारा लगने पर कोर्ट में तर्क दें कि अधिकतम सजा के आधार पर 90 दिन लागू है।

समयसीमा खत्म होते ही BNSS धारा 479 के तहत डिफ़ॉल्ट बेल का आवेदन करें।

निष्कर्ष

POCSO मामलों में "60 दिन" का नियम सीधा लागू नहीं होता — यह अपराध की अधिकतम सजा पर निर्भर करता है। पुलिस हिरासत और चार्जशीट समयसीमा का गलत इस्तेमाल न्याय व्यवस्था और मानवाधिकार दोनों के लिए हानिकारक है।

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